सर्वाधिकार सुरक्षित

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

Click here for Myspace Layouts
Free CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree Counters

Monday, July 30, 2012

बुला गए बदरा



बिखर या कजरा,
लुभा गए बदरा।

छत पर खड़ी निखारती रही डगरिया,
तुम न आए पिया, थक गई नजरिया ।

बहा गए बदरा,
पलकों का कजरा ।

सकुच सकुच खोली गीली कंचुकिया,
इतने में मुसकाई शोख बिजुरिया ।

दहक गए बदरा,
अंग अंग पियरा ।

कि बैरिन बयार खुड़काए कि‍वडि़या,
आहट पर उचट उचट जाए निंदिया ।

पहिनाए बदरा,
मोती का गजरा ।

डसती एकाकी सावन की रतियां,
आओ बतियायें हम मन की बतियां ।

उमड़ उमड़ गहरा,
बुला गए बदरा ।

------