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Wednesday, May 9, 2012

प्रतीक्षारत मेरी आंखें

प्रतीक्षारत
मेरी आंखें
निहारती रहीं
तुम्‍हारे होंठो की ड़योढी के भीतर
कुलबुलाती मुस्‍कान को
जिसे पाकर
मेरा
आवारा प्रश्‍न
एक सही उत्‍तर लिख देता,
मगर-
तुमने
ओढ लिया मुंह तक अंधेरा
दफना कर उजेरा
तो फिर
मेरे लिए
मात्र
मूंग-से बिखरे
संदर्भों को चुनने का
विकल्‍प ।

बरसाती नदी

गांव के समीप
एक बरसाती नदी है
जो- वर्षा बीत जाने के बाद
सर्दी के विदा होते-होते
गर्मी के आते-आते
ऊँघने लगती है
दिन के उजाले में
बंद आंखों में
सपने-सी
भीतर ही भीतर
अंधेरों में
बहती है
इसे क्‍या संज्ञा दूँ ?