सर्वाधिकार सुरक्षित

MyFreeCopyright.com Registered & Protected

Click here for Myspace Layouts
Free CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree CountersFree Counters

Tuesday, July 24, 2012

मदहोशी की रात है



नयनों से मत बात करो
अधरों से कुछ मधु घोलो
होश की न बात कहो तुम कि मदहोशी की रात है।

नभ के आंगन में सजी,
सितारों की बारात है,
देख धरा का प्‍यार प्राण ! 
गलता चाँद का गात है।
प्रीति-घट रीते मत धरो
अधर के पनघट डुबोलो
पलक की गोद में भीगी, मधु-प्रणय की बरसात है।

मन के सरोवर में खिले,
प्रिये ! प्रणय-जलजात है,
अभिलाषा का शिशु-छोना
मचला, चाह अज्ञात है।
बीच मंझदार मत तरो
बांहों के तट मन घोलो
गीत का चाँद ढ़ल रहा, पास आओ मेरी सौगात है।
-------