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Sunday, September 9, 2012

अनमनी सुबह



कैसे मुस्‍काएं, कौन गीत गाएं?
अनमनी सुबह है, उदास संध्‍याएं।।

हृदय का मधुवन, मन की अमराई,
बदरंग हुई सब, तन की ऋचाएं ।

गमलों से पढ़ते रहे हम मधुमास-
औ’ मौसम की पुस्‍तकी परिभाषाएं।

गंधायित-सौगातें वो बिसर गईं,
गन्‍ध-पांखुरी पर लिखी कविताएं।

दे डाली सब इच्‍छाओं की आहूति,
चुकती जातीं श्‍वासों की समिधाएं।

चुक गए सभी सम्‍मोहनी सम्‍बोधन,
अर्थविहीन हो गई संज्ञाएं।

किस सरिता-जल में निथर आए हम,
दूषित गंगा-जमुना की धाराएं।
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