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Thursday, May 17, 2012

क्‍लर्क

चश्‍मे के भीतर से
घूरती
घाघ क्‍लर्की आंखे
आगन्‍तुकों को
आतंकित कर
व्‍यर्थ-सी
मशगूल हो गई
सामने स्‍वेटर के फंदे बरती
टाइपिस्‍ट पर
और काली मजदूरिन की
सपाट-सूखी छाती सी
टेबिल पर गोलाई की मुद्रा में
अंगुलियां
नचाते हुए
लावारिस नाजायज औलाद सी
फाईल
एक ओर सरका
एक प्रश्‍न चिन्‍हीं दृष्टि
फैंक
हांक लगाई-
’’धनीराम! पेपरवेट’’
आगन्‍तुक ने
होंठों पर
मिमियाती हंसी लाते हुए
द्वार पर बीडी फूंकते
धनीराम के हाथ पर हाथ रखा
फिर-
’’हाँ, बाबूजी पेपरवेट’’
कहते हुए
चुम्‍बकीय गति से
धनीराम
फाईल उठा
साहब के कमरे में घुस गया।
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