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Friday, August 3, 2012

डूबे नयन में जब नयन




डूबे नयन में जब नयन ।

रस-प्‍लावित अरूण अधर पर,
कम्पित दो अधर जब धरे,
झुकीं समर्पण में पलकें
प्रश्‍वास प्रसून-सा झरे ।

गंधाये कुसुमित दो क्षण।
डूबे नयन में जब नयन ।।

कुन्‍तलों में घुमा कर-
नेहमय बजा मौन संगीत,
तिमिर गुहा-घाटियों में,
प्रसूता मधुर प्रणय-गीत।

चन्‍दन से महकें श्रम-कण ।
डूबे नयन में जब नयन ।।
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