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Thursday, June 7, 2012

उगते आस्‍था के फूल

बूढ़े, लंगड़े,
बौंडे, खूंटे छोड़े
जर्दिया पान की पीक से
बदुआते
आदर्श-
दांत खिसियाते हैं;
धुंआती अफवाहें
सठियाये संशय
कीलते हैं
मेरी राहों को,
चुगल-खोर हवाओं की
फसफुसाहटें
नोंचती है
मेरे युवा मस्तिष्‍क को;
तब उदास निगाहों को
टांक देता हूँ
आश्‍वस्‍त होने को
तुम्‍हारे रेशमी-बालों पर
और
तुम्‍हारे होठों पर
उगते आस्‍था के फूल
प्रेरणा देते हैं
मुझे
विश्‍वास के देवदार पर
चढ़ने की
आकाश की ऊँचाइयों को
नापने की।
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Wednesday, June 6, 2012

निकल छन्‍दों की कैद से

निकल छन्‍दों की कैद से
गीत
चाहता है नए अर्थ में जीना।
बूड़ी उपमाओं के
अनुसरण का
नहीं चाहता अंकुश
अक्षर
व्‍याकरण का
अवसरवादी अलंकारित
पंक्तियां
है इनकी कुंठित लय-वीणा।
नहीं मांगता तन
स्‍वर्ण स्‍याही का
प्रतीक यह
प्रगीत
संबल हर राही का
शीर्षकों के कोलाहल से
अलग-सा
अपने पानी का स्‍वनाम नगीना।
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Tuesday, June 5, 2012

आंचल


उषा के आंचल की
गांठ खुली
घर आंगन
छत पर
भीतर बाहर
पथ पर
श्‍वेत-श्‍वेत किरणों की
ज्‍वार रुली
जगी भीड़
नगर-ग्राम
धूप से फैले
अनेक काम
बर्फ सी जमी राज
पिघली ।
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Monday, June 4, 2012

बंसी धुन

टूट गए
किरणों के गोफन
सूरज का ग्‍वाला
ले गया घेरे
चरागाहों से
धूप की भेड़ें
लौट रहे
जंगलों से गौधन।
उंढ़ेल गया रंग
नभ के दर्पण पे
घिर गई उदासी
राधा के मन पे
छेड़ रहे
बंसी-धुन मोहन।

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Saturday, June 2, 2012

नेता जी


नेता जी !
देशहित......... ?
''अपवाद''
नेता !
समाजवाद........ ?
''गरम कोट

सर्दी आई पहन लिया

गर्मी आई उतार दिया।''

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Friday, June 1, 2012

अधूरा स्‍वप्‍न

हम अँधेरों में
टटोलते थे
सूरज
उगने के साथ
टूट गया
एक अधूरा स्‍वप्‍न
जगे तो
चाय के साथ
पी लिया
झूठ
औढ़ लिया
स्‍वार्थ की चादर को
जतन से
आंखों पर पहल लिया
सुनहरी फ्रेम वाला
भ्रम का काला चश्‍मा
चुनने तो थे मोती
बीनने लगे
घोंघे
सागर पर उगना था बनकर सेतु
होना था पार
जनगण को
डुबो दिया 
सब गलत हो गया।

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Thursday, May 31, 2012

अंधेरे चश्‍में

आंखों पर
लगा अँधेरे चश्‍में
तलाशते हैं रोशनी।
गुजरते हैं
पकड़ अंगुली गुनाह के
तंग रास्‍तों से,
करते हैं दोस्‍ती
पहन कर खद्दर
एैयाशी के गुमाश्‍तों से,
करते हैं बातें चरित्र की
मारते हैं
लड़कियों को को कुहनी।
तलाशते हैं
जन्‍म पर विषमताओं को
समाधान
भाषण में,
बन्‍द है पुस्‍तकों में
गाँधी का दर्शन
कहां है आचरण में ?
कौन पढ़े-गुने
कुर्सियों की चिन्‍ता में
जीते हैं
सुरा-मोहिनी।
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